1यहूदिया में रहने वाले इस्राएलियों ने सुना कि अस्सूरियों के राजा नबूकदनेज़र के प्रधान सेनापति होलोफ़ेरनिस ने उन लोगों के साथ क्या-क्या किया था, अर्थात् उसने किस प्रकार उनके सब देवालयों को लुटवा कर नष्ट कर दिया था। 2यह सुन कर वे उस से भयभीत हुए और येरूसालेम और प्रभु-ईश्वर के मन्दिर के कारण घबरा गये; 3क्योंकि थोड़े समय पहले ही वे निर्वासन से लौटे थे, यूदा की जनता एकत्र हो गयी थी और पात्रों, वेदी और ईश्वर के मन्दिर का दूषण दूर कर इन सब की शुद्धि की गयी थी। 4इसलिए उन्होंने समस्त समारिया प्रान्त, कोना, बेत-होरोन, बेलमैल, येरीख़ो, खोबा, ऐसोरा और सालेम के मैदान के निवासियों को एक सन्देश भेजा। 5उन्होंने ऊँचे पर्वतों के सब शिखर अपने अधिकार में कर लिये, उन पर अवस्थित सब गाँवों के चारों ओर दीवारें बनवायीं और क्योंकि हाल में फ़सल कटी थी, उन्होंने युद्ध के लिए रसद एकत्र किया। 6येरूसालेम के तत्कालीन प्रधानयाजक योआकीम ने बेतूलिया और एस्द्रालोन के सामने, दोतान के निकटवर्ती मैदान में अवस्थित बेतोमेस्ताईम के निवासियों को लिखा 7कि वे पहाड़ों की सब घाटियाँ अपने अधिकार में कर ले; क्योंकि उन से हो कर यहूदिया जाया जा सकता था। वहाँ किसी को आगे बढ़ने से रोकना आसान था; क्योंकि प्रवेश-मार्ग इतना सँकरा था कि केवल दो आदमी एक साथ जा सकते थे। 8इस पर इस्राएलियों ने प्रधानयाजक योआकीम और येरूसालेम में रहने वाले समस्त इस्राएल की समिति के नेताओं के आदेश का पालन किया। 9सभी इस्राएलियों ने आग्रहपूर्वक ईश्वर की दुहाई दी और ईश्वर के सामने दीन बन कर कठोर उपवास किया। 10वे, उनकी पत्नियाँ, उनके बाल-बच्चे, उनके पशु, उनके सब प्रवासी, मज़दूर और दास-सब ने टाट ओढ़ लिये। 11येरूसालेम के प्रत्येक इस्राएली पुरुष, स्त्री और बच्चे-सब ने मन्दिर के सामने दण्डवत् किया। उन्होंने अपने-अपने सिर पर राख डाली और अपने टाट के वस्त्र प्रभु के सामने फैला दिये। 12उन्होंने वेदी को भी टाट से ढक दिया। वे एक स्वर से आग्रहपूर्वक इस्राएल के ईश्वर की दुहाई देते रहे, जिससे वह यह न होने दे कि उनके बच्चों का अपहरण हो, उनकी पत्नियों को बन्दी बनाया जाये, उनके दायभाग के नगरों का विनाश हो और विजयी राष्ट्रों द्वारा उनके मंदिर का अपत्रीकरण और अपमान किया जाये। 13प्रभु ने उनकी पुकार सुनी और उनकी विपत्ति पर ध्यान दिया। समस्त यहूदिया में और येरूसालेम के सर्वशक्तिमान् ईश्वर के मन्दिर के सामने लोग कई दिनों तक उपवास करते रहे। 14प्रधानयाजक योआकीम, प्रभु के सामने उपस्थित सब याजक और प्रभु के मन्दिर के सब सेवक कमर में टाट बाँधे दैनिक होम-बलि, मन्नत की बलियाँ और लोगों द्वारा दिये हुए स्वेच्छा से अर्पित बलिदान चढ़ाते रहे। 15वे अपनी पगड़ियों पर राख डाल कर ज़ोर-ज़ोर से प्रभु की दुहाई दे रहे थे, जिससे वह इस्राएल के समस्त घराने पर कृपादृष्टि करे।