यूदीत

अध्याय 2

1अठाहरवें वर्ष के पहले महीने के बाईसवें दिन, अस्सूरियों के राजा नबूकदनेज़र के महल में इसकी चरचा हुई कि वह अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार उन सभी देशों में बदला लेगा। 2उसने अपने सब दरबारियों और अपने सब उच्च पदाधिकारियों को एकत्रित कर एकान्त में उन्हें अपना निर्णय बताया कि वह अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार उन सब देशों का विनाश करेगा। 3उन्होंने भी इस निर्णय का समर्थन किया कि उन सब का सर्वनाश किया जाये, जिन्होंने उसकी आज्ञा की अवहेलना की थी। 4इस सभा के बाद अस्सूरियों के राजा नबूकदनेज़र ने अपने प्रधान सेनापति होलोफ़ेरनिस को, जिसका उसके बाद दूसरा स्थान था, बुलाया 5और उस से कहा, "समस्त पृथ्वी के राजाधिराज की आज्ञा हैः तुम यहाँ से विदा हो कर अपने साथ ऐसे व्यक्तियों को ले जाओ, जिन को अपने बल पर भरोसा हो। तुम एक लाख बीस हज़ार पैदल सैनिकों और बारह हज़ार घुड़सवारों को ले कर 6सारे पश्चिमी देशों पर इसलिए आक्रमण करोगे कि उन्होंने मेरे आदेश की अवहेलना की थी। 7तुम उन्हें यह आज्ञा भी दोगे कि वे अधीनता स्वीकार करें। नहीं तो मैं क्रुद्ध हो कर उन पर आक्रमण करूँगा और पृथ्वी को अपनी सेना से पाट कर उन्हें लुटवाऊँगा। 8उनके घायलों से घाटियाँ भर जायेंगी और उनके मृतकों की लाशों से नाले और नदियाँ इस प्रकार प्रकार पट जायेंगी कि पानी उनके तट के ऊपर से बह निकलेगा। 9मैं उनके बन्दियों को पृथ्वी के कोनों तक ले जाऊँगा। 10तुम जा कर मेरे लिए उन लोगों के सभी सीमान्तों पर अधिकार करोगे। जब वे तुम्हें अपने को समर्पित करेंगे, तो उन्हें मेरे लिए उस दिन तक रख छोड़ोगे, जिस दिन मैं स्वयं उन को दण्ड देने जाऊँगा। 11जो तुम्हारा विरोध करेंगे, तुम उन पर दया मत दिखाओगे। उन्हें सब जगह वध और लूट का शिकार होने दोगे ; 12क्योंकि मैंने अपने जीवन और राज्याधिकार की शपथ खा कर जो कहा है, मैं उसे अवश्य पूरा करूँगा । 13तुम अपने स्वामी की इन आज्ञाओं में एक का भी उल्लंघन नहीं करोगे, बल्कि जैसा मैंने आदेश दिया, उसका बिना विलम्ब किये अवश्य पालन करोगे।" 14होलोफ़ेरनिस ने अपने स्वामी से विदा ले कर सब सामन्तों और अस्सूर की सेना के सेनापतियों और अध्यक्षों को बुलाया 15और अपने स्वामी के आदेशानुसार युद्ध के लिए उत्तम सैनिकों को चुना-एक लाख बीस हज़ार पैदल सैनिकों और बारह हज़ार घुड़सवार तीरन्दाज़ों को-ऽ 16और युद्ध के लिए उनकी व्यूहरचना की। 17वह इनके साथ बहुत से ऊँटों, गधों और खच्चरों को माल-असबाब लादने के लिए तथा असंख्य भेड़ों, गायों और बकरियों को रसद के लिए ले गया। 18उसने प्रत्येक सैनिक के लिए भरपूर भोज्य-पदार्थ का प्रबन्ध किया और राजभवन से प्रचुर मात्रा में सोना-चाँदी निकलवायी। 19इस प्रकार वह अपनी सारी सेना के साथ राजा नबूकदनेज़र से पहले नीनवे से चल पड़ा, जिससे वह सभी पश्चिमी देशों को अपने रथों, घुड़सवारों और चुने हुए पैदल सैनिकों से भर दे। 20उनके साथ हर प्रकार के अन्य लोग भी थे, जो टिड्डियों और पृथ्वी के रेतकणों की तरह असंख्य थे। 21वे नीनवे की तीन दिन की यात्रा की दूरी तक, बेकटिलेत के मैदान तक गये और उन्होंने बेकटिलेत के पास, जो उस पर्वतश्रेणी के निकट है जो किलीकिया के ऊपरी भाग में अवस्थित है, पड़ाव डाला। 22फिर वह अपनी सारी सेना-पैदल सैनिक, घुड़सवार और रथ-ले कर वहाँ से पहाड़ी प्रान्त की ओर आगे बढ़ा। 23पूद और लूद वालों को पराजित कर उसने रस्सीद के सभी वंशजों और इसमाएलियों को लूटा, जो खलैयों के देश के दक्षिण में उजाड़खण्ड के निकट रहते हैं। 24इसके बाद वह फ़रात नदी पार कर मेसोपोतामिया हो कर गया और समुद्र तक आगे बढ़ कर अब्रोना नदी के पास के सब क़िलाबन्द नगरों को ध्वस्त कर दिया। 25उसने किलीकिया प्रान्त पर अधिकार कर लिया और अपने सब विरोध करने वालों का वध किया। इस प्रकार वह याफ़ेत की सीमा तक आया, जो दक्षिण में अरब के सामने है। 26इसके बाद उसने मिदयान के सभी वंशजों को घेर कर उनके खेमों को जला दिया और उनके रेवड़ों को लूटा। 27तब वह गेहूँ की फ़सल के समय दमिश्क के मैदान में उतरा और उसने उनके सब खेत जला दिये, उनका पशुधन नष्ट किया, उनके नगरों को लूटा, उनके मैदान उजाड़ दिये और उनके सब नौजवानों को तलवार के घाट उतार दिया। 28तब समुद्रतट के लोग, सीदोन और तीरुस के निवासी, सूर और ओकीना के निवासी तथा यमनिया के सब निवासी भयभीत हो कर काँपने लगे। अशदोद और अशकलोन के निवासी उस से बहुत डरने लगे।