यिरमियाह का ग्रंथ 33ः14-1 थेसलनीकियों के नाम पहला पत्र 3ः12-4ः2 लूकस 21ः25-28; 34-36h2>
‘‘आईये हम राजा येसु की आराधना करें जो आने वाला है।’’ इसी उद्घोषणा के साथ माता कलीसिया आज आगमनकाल का आगाज़ करती है। आगमन याने किसी का आना। इस पवित्र आगमनकाल में हम प्रभु येसु के आने की तैयारी करते हैं। इस समय हम दो प्रकार के आगमन की याद करते हैं जहाँ एक ओर हम उनके प्रथम आगमन की याद करते हैं जब वह मानवता के उद्धार हेतु मनुष्य बनकर इस धरा पर आये; वहीं दूसरी ओर उनके द्वितीय आगमन की तैयारी करते हैं जब वह अंत समय में हमारा न्याय करने आयेंगे। इसलिए हर विष्वासी जो प्रभु के प्रथम आगमन की यादगार मनाता है उसे चाहिए कि वह उतनी ही मुस्तैदी से उनके द्वितीय आगमन की तैयारी भी करे।
प्रभु येसु आये थे, आते हैं, और आते रहेंगे। प्रभु येसु इतिहास में आये और इतिहास का एक भाग बन गये; वह संस्कारों के रहस्य में रोज़ हमारे बीच आते हैं और दुनिया के अंत में महिमा के साथ फिर आयेंगे। येसु प्रेम के साथ बेतलेहेम में आये। वह कृपा के साथ हमारी आत्माओं में आते हैं और दुनिया के अंत में न्याय के साथ फिर आयेंगे। आज की धर्म का सुसमाचार पाठ हमें कहता है - ‘‘जब ये बातें होने लगेंगे, तो उठ कर खडे हो जाओ और सिर ऊँपर उठाओ, क्योंकि तुम्हारी मुक्ति निकट है’’ (लूक 21ः28)। सुसमाचार के प्रारम्भ में भयानक विपत्तियों का वर्णन किया गया है। लेकिन ये अंतिम पंक्तियाँ हमारा सारा भय व अषंकायें दूर कर देती है। प्रभु कहते हैं कि इन विषम परिस्थितियों के बावज़ूद भी तुम जो विष्वासी हो, धीरज धरो क्योंकि तुम्हारा उद्धार ईष्वर के हाथों में है। प्रभु हमें अपना सिर ऊँचा करने को कहते हैं। इसका मतलब होता है कि हम हमारे मन को स्वर्गीय आनन्द कि ओर ऊँचा उठायें। आगमन का समय हमारे लिए एक उम्मिद का समय है आषा का समय है। महिमा गान इस समय नहीं गाया जाता, ये इसलिए नहीं कि हम दुःखी हैं परन्तु इसलिए कि जब हम इसे क्रिसमस के दिन गायेंगे तो हमारा ये गीत दूतों के स्वरों के साथ मिलकर हमें ईष महिमा का एक नया आनन्द प्रदान करें।
आज का पहला पाठ हमें, उम्मीद बंँधाते हुवे कहता है कि ‘‘उन दिनों युदा का उद्धार होगा, येरूसालेम सुरक्षित रहेगा’’ (यिर 33ः16)। प्रभु आज हमें, नयी इस्राएली प्रजा को ये आष्वासन देते हैं कि हम सुरक्षित रहेंगे, बच जायेंगे, हमारा विनाष नहीं होगा। हम कैसे बच जायेंगे? उद्धार पाने के लिए सिर्फ ईसाई होना, ही काफी नहीं है। हमें प्रभु की बातों पर ध्यान देना होगा; उनके वचनों पर विष्वास करना होगा; उनके वचनों पर चलना होगा। प्रभु हमें तुम सुरक्षित रहोगे, तुम मुक्ति प्राप्त करोगे ये इसलिए नहीं कह रहे हैं कि हम सिर्फ ईसाई हैं पर इसलिए कि ईसाई होने के नाते, विष्वासी होने के नाते हम प्रभु के वचनों को जानते हैं और उसका पालन करते हैं। प्रभु ने समय से पहले आगाह कर दिया है। प्रभु का वचन हमारे पास है। यदि हम प्रभु के वचन को सुनते और उसके अनुसार आचरण करते हैं तो हमारा उद्धार निष्चित है।
पवित्र बाईबल में हमें कई ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जहाँ ईष्वर ने अपने प्रिय जानों को, अपने भक्तों को चेतावनी दी और उन्होंने ईष्वर की चेतावनी पर ध्यान दिया और वे बच गये तथा जिन्होंने चेतावनी पर ध्यान नहीं दिया उनका विनाष हो गया। नूह के ज़माने में सारी पृथ्वी पर पाप फैल गया था केवल नूह और उसका परिवार धर्मी था ईष्वर ने सारे संसार को जल प्रलय द्वारा नष्ट करने की योजना बनाई। उसने नूह को एक जहाज बनाकर अपने परिवार के साथ उस में सवार होने को कह दिया। उसने वैसा ही किया जैसा ईष्वर ने आदेष दिया था। और वह अपने परिवार के साथ बच गया। अब्राहम के समय, सोदोम और गोमोरा नामक दो नगरों के लोग वासना के पाप में डूब गये थे तब ईष्वर ने उन दो नगरों को आग बरसाकर भस्म करने की ठानी। वहाँ एक धर्मी परिवार रहता था। वह था अब्राहम का भतीजा लोट। ईष्वर ने उन्हें नगर से भाग जाने का आदेष दिया और चेतावनी दी कि तुम वापस मुडकर नहीं देखना। वे नगर छोडकर भाग रहे थे कि बीच में लोट की पत्नी ने पीछे मुडकर देख लिया और वह नमक का खंबा बन गयी जबकि लोट बच गया। जब ईष्वर का दूत दसवीं व आखरी विपत्ति के रूप में मिस्र में रहने वाले हर इंसान व जानवर के पहलौटों को मारने आने वाला था तो प्रभु ने मूसा द्वारा ईस्राएलियों को उस रात अपने घरों की चैखट पर मेमने का रक्त पौत देने का आदेष दिया। इस्राएलियों ने वैसा ही किया। रात ईष्वर का दूत आया जिस घर की चैखट पर मेमने का रक्त लगा था उन घरों को छोडकर बाकि सब घरों के पहलोटों को मार डाला गया, इस्राएलि बच गये। जब मुम्बई में ताज होटल पर आतंकि हमला हुआ था तब कहा जता है कि खुफिया एजेंसि को इसकी भनक लग चुकि थी। और उन्होंने इसकी सुचना गृह मंत्रालय व सुराक्षा विभाग को दे दी थी। लेकिन किसी ने इस को ज़्यादा घंभीरता से नहीं लिया और उसका अंज़ाम क्या हुआ हम सब जानते हैं।
आज के सुसमाचार के द्वारा प्रभु भी हमें समय रहते चेतावनी दे रहे हैं ‘‘सावधान रहो। कहीं ऐसा न हो कि भोग-विलास, नषे और इस संसार की चिंताओें से तुम्हारा मन कुंठित न हो जाये और वह दिन फन्दे की तरह अचानक आप पर आ पडे; क्योंकि वह दिन समस्त पृथ्वी के निवासियों पर आ पडेगा। इसलिए जागते रहो और सब समय प्रार्थना करते रहो, जिससे तुम इन सब आने वाले संकटों से बचने और भरोसे के साथ मानव पुत्र के सामने खडे होने योग्य बन जाओ’’ लूक 21ः34-36। अब जागते रहना या सोते रहना हमारे ऊँपर निर्भर है। जब चिडिया खेज चुग जायेगी तब पछताने से कुछ भी नहीं मिलने वाला। याद करो गरीब लाज़रूस व धनी के उस दृष्टाँत को मरने के बाद पछताता है वो, मरने के बाद उसको लाज़रूस का ख्याल आता है। पिता अब्राहम से कहता है कि वह लाज़रूस को एक बंूद पानी लेकर उसके पास भेज दे। हम उन पाँच नासमझ कुँवारियों के समान न बनें जो दुल्हे की अगवानी करने तो गयी लेकिन अपने लिए प्र्याप्त तेल नहीं ले गयीं। तब अंत में रोने से कुछ भी हासिल नहीं होगा जब द्वार बंद कर लिए जायेगा। तब हम ये कहेंगे प्रभु हमने आपके नाम पर बपतिस्मा ग्रहण किया है। प्रभु हम कभी-कभी गिरजा भी जाते थे। प्रभु कहेंगे मैं तुम्हें नहीं जानता। प्रभु हमारे पाखंड से नहीं हमारी सच्ची धार्मिकता से प्रसन्न होता है। वह हमसे पुछेंगेे तुम चर्च गये थे ठिक बात है, नोवेना में भाग लिया बहुत अच्छा पर मैं जब भूखा क्या तुमने मुझे खिलाया, मैं प्यासा था तब क्या तुमने मुझे पिलाया, मैं बिमार, बंदी व परदेसी था तब क्या तुम मुझसे मिलने आये? तब उस समय कोई भी बहाना प्रभु के सामने नहीं चलेगा। तब हम यदि मुर्खों की तरह कहने लगेंगे - ‘‘प्रभु आप कब आये हमारे पास, यदि मुझे पता होता तो रोटी क्या मैं तो 5 स्टार होटल में मेरे प्रभु को पार्टी देता। हमें तो पता ही नहीं चला! प्रभु कहेंगे तुमने मेरे इन छोटे से छोटे भाईयों के लिए जो कुछ भी किया वो मेरे लिए किया और जो नहीं किया वो मेरे लिए नहीं किया। इसलिए जाओ उस नरक की आग में जो तुम्हारे लिए तैयार की गयी है। संत योहन के पहले पत्र 4ः12 प्रभु का वचन हमसे कहता है - ‘‘ईष्वर को किसी ने कभी नहीं देखा। यदि हम एक दूसरे को प्यार करते हैं, तो ईष्वर हम में निवास करता है और ईष्वर के प्रति हमारा प्रेम पूर्णता प्राप्त करता है। और वचन 20 कहता है यदि कोई कहता है कि मैं ईष्वर से प्रेम करता हूँ और वह अपने भाई से बैर करता है, तो वह झूठा है। यदि वह अपने भाई को जिसे वह देखता है, प्यार नहीं करता, तो ईष्वर को, जिसे उसने कभी नहीं देखा, प्यार नहीं कर सकता।’’
तो आईये आज हम आगमनकाल में जब हमारे मुक्तिदाता के हमारे दिलों में जन्म लेेने की तैयारी करते हैं, तो न केवल बाहरी तैयारियँा करें परन्तु भलाई के कार्यों व आध्यात्मिक कार्यों द्वारा स्वयं को तैयार करें। और जैसा कि मैंने शुरू में कहा कि हम दो प्रकार के आगमनों पर मनन-चिंतन करते हैं इसलिए हमारा उद्देष्य सिर्फ क्रिसमस की तैयारी नहीं परन्तु दूसरे आगमन की तैयारी भी होना चाहिए।